डायबिटीज़ और भावनात्मक कारण: होम्योपैथिक दृष्टि से समाधान — डा. माना एवं डॉ. कार्तिक
परिचय
डायबिटीज़ (Madhumeh / Diabetes Mellitus) आज की सबसे बड़ी जीवनशैली संबंधी बीमारियों में से एक है। आमतौर पर इसे केवल रक्त में शर्करा (blood sugar) के बढ़ने से जोड़ा जाता है, लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इसके पीछे केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक कारण भी छिपे हो सकते हैं।
होम्योपैथी में माना जाता है कि रोग केवल शरीर का नहीं होता, बल्कि यह मन, भावनाएँ और जीवनशैली से मिलकर उत्पन्न होता है। डा. माना और डॉ. कार्तिक बताते हैं कि डायबिटीज़ रोगियों में अक्सर तनाव, असुरक्षा और भावनात्मक असंतुलन देखा जाता है, जिसे समझना और संतुलित करना ज़रूरी है।
डायबिटीज़ में भावनात्मक कारण (पॉइंट-वाइज़)
1. दीर्घकालिक तनाव (Chronic Stress)
लगातार तनाव से cortisol व adrenaline का स्तर बढ़ता है।
यह इंसुलिन-रेज़िस्टेंस को बढ़ाकर रक्त शर्करा को प्रभावित करता है।
2. असुरक्षा और चिंता
भविष्य की चिंता, परिवार या आर्थिक सुरक्षा को लेकर डर।
“अगर मैं बीमार पड़ गया तो परिवार का क्या होगा?” जैसी सोच।
3. क्रोध और दबा हुआ गुस्सा
लंबे समय तक गुस्सा दबाना या व्यक्त न करना।
यह sympathetic nervous system को overactive बनाता है।
4. शोक और हानि का दर्द
प्रियजन की मृत्यु या संबंध-विच्छेद।
भावनाएँ भीतर दबाकर रखने से शरीर पर बोझ बढ़ता है।
5. अपराधबोध और आत्म-भर्त्सना
अपने ही निर्णयों को लेकर लगातार पछतावा।
“काश मैंने ऐसा न किया होता” जैसी सोच।
6. निराशा और हताशा
जीवन में बार-बार असफलताओं का अनुभव।
इससे self-esteem कम होती है और ऊर्जा घटती है।
होम्योपैथिक दृष्टिकोण
होम्योपैथी व्यक्ति को केवल रोग के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी समग्र अवस्था (Totality of Symptoms) के आधार पर समझती है।
🎉मन + शरीर + जीवनशैली को मिलाकर औषधि दी जाती है।
🎉रोगी की मानसिक प्रवृत्ति, भावनात्मक प्रतिक्रिया, नींद, भूख-प्यास सबको ध्यान में रखा जाता है।
🎉उद्देश्य केवल शुगर कम करना नहीं, बल्कि रोगी के आंतरिक संतुलन को बहाल करना है।
🙏सामान्य होम्योपैथिक औषधियाँ (शैक्षिक सुझाव मात्र)
⚠️ ध्यान दें: दवा हमेशा प्रमाणित होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श करके ही लें।
🎈Phosphoric acid — थकावट, मानसिक तनाव, शोक के बाद डायबिटीज़
🎈Syzygium jambolanum — ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायक, excessive thirst/urination
🎈Ignatia — भावनात्मक झटका, शोक या चिंता के बाद रोग का बढ़ना
🎈Natrum muriaticum — अंतर्मुखी, पुराने शोक व असुरक्षा को दबाकर रखना
🎈Lycopodium — आत्मविश्वास की कमी, क्रोध और पाचन गड़बड़ी के साथ डायबिटीज़
🎈Arsenicum album — चिंता, असुरक्षा, रात में बेचैनी और थकान
निष्कर्ष
डायबिटीज़ केवल शरीर का रोग नहीं, बल्कि भावनाओं और जीवनशैली का प्रतिबिंब भी है। तनाव, चिंता, असुरक्षा, शोक और अपराधबोध इस रोग को और जटिल बना सकते हैं।
डा. माना और डॉ. कार्तिक का संदेश है:
👉 “डायबिटीज़ को केवल दवा से नहीं, बल्कि जीवनशैली, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच से नियंत्रित किया जा सकता है। होम्योपैथी इस दिशा में एक समग्र और सुरक्षित विकल्प देती है।”