कब्ज़ (Constipation) और भावनात्मक कारण: होम्योपैथिक दृष्टि से समाधान

Published Oct 4, 2025 4 min read

शीर्षक

कब्ज़ (Constipation) और भावनात्मक कारण: होम्योपैथिक दृष्टि से समाधान — डा. माना एवं डॉ. कार्तिक

परिचय

कब्ज़ (Constipation) केवल पेट या आँतों की समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवनशैली, तनाव और भावनात्मक स्थिति से गहराई से जुड़ा हुआ विकार है। आधुनिक चिकित्सा इसे फाइबर की कमी या पानी न पीने का परिणाम मानती है, परंतु होम्योपैथी इसे मन और शरीर के बीच के असंतुलन के रूप में भी देखती है।

डा. माना और डॉ. कार्तिक बताते हैं कि कब्ज़ कई बार केवल भोजन की गलती से नहीं, बल्कि दबी हुई भावनाएँ, नियंत्रण की प्रवृत्ति, डर, अपराधबोध या तनाव के कारण भी होती है। जब मन अपने अंदर कुछ छोड़ नहीं पाता, तो शरीर भी मल त्याग के स्तर पर “छोड़ना” बंद कर देता है।

कब्ज़ के पीछे छिपे भावनात्मक कारण (पॉइंट-वाइज़)

1. नियंत्रण की प्रवृत्ति (Control Issues)

जो लोग हर चीज़ को नियंत्रित रखना चाहते हैं, वे भावनात्मक रूप से “release” नहीं कर पाते।

यह मानसिक कठोरता शरीर में भी “कठोरता” के रूप में प्रकट होती है — यानी मल त्याग में रुकावट।

2. डर और असुरक्षा (Fear & Insecurity)

किसी अनिश्चित परिस्थिति का भय या सुरक्षा की कमी।

शरीर प्रतीकात्मक रूप से “रोक” देता है — जैसे अपने भीतर सब कुछ पकड़े रखना।

3. अपराधबोध (Guilt)

पुराने अनुभवों या गलतियों के लिए स्वयं को दोष देना।

यह भावना शरीर में “रुकावट” और “भारीपन” के रूप में जमा हो जाती है।

4. दबी हुई भावनाएँ (Suppressed Emotions)

गुस्सा, रोष या दुःख व्यक्त न करना।

जब मन अभिव्यक्ति रोक देता है, तो शरीर भी निष्कासन प्रक्रिया रोक देता है।

5. तनाव और मानसिक थकान (Stress & Overthinking)

लगातार सोचते रहना, चिंता या perfectionism।

यह मस्तिष्क-आँत (Brain–Gut Axis) को प्रभावित कर मल त्याग की लय को बिगाड़ देता है।

6. असंतोष और जड़ता (Stubbornness & Rigidity)

परिवर्तन स्वीकार न कर पाना या “छोड़ने” में कठिनाई।

ये भावनाएँ शरीर में अवरोध (blockage) के रूप में अनुभव होती हैं।

होम्योपैथिक दृष्टिकोण

होम्योपैथी व्यक्ति को समग्र रूप में देखती है — यानी शरीर, मन, और भावनाओं को एक इकाई मानकर।

डा. माना और डॉ. कार्तिक बताते हैं:

कब्ज़ केवल पेट की समस्या नहीं, बल्कि रोकने की मानसिक प्रवृत्ति का संकेत हो सकता है।

जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से हल्का और मुक्त महसूस करता है, तो पाचन तंत्र स्वतः ही लय में आ जाता है।

इसलिए होम्योपैथिक औषधि का चयन रोगी के शारीरिक लक्षणों के साथ मानसिक स्वभाव को देखकर किया जाता है।

सामान्य होम्योपैथिक औषधियाँ (शैक्षिक सुझाव मात्र)

> ⚠️ यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से है। औषधि का सेवन योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही करें।

1. Nux Vomica – तनाव, अधिक काम, देर रात तक जागने या कॉफी सेवन से होने वाली कब्ज़।

ऐसे व्यक्ति जो गुस्सैल, परफेक्शनिस्ट और जल्दी चिड़चिड़े होते हैं।

2. Bryonia alba – सूखापन, कठोर मल, दर्द के डर से मल त्याग रोकना।

स्वभाव में गंभीरता, स्थिरता और दूसरों से दूरी बनाए रखना।

3. Opium – लंबे समय तक तनाव या भय के बाद मल का पूरा रुक जाना।

मानसिक रूप से सुन्नता, भावनात्मक जड़ता।

4. Alumina – क्रॉनिक कब्ज़, मल त्याग की इच्छा का अभाव, जीवन में दिशा या गति की कमी।

5. Silicea – शर्मीले, आत्मविश्वासहीन व्यक्ति जिनमें शरीर धीरे-धीरे प्रतिक्रिया करता है।

मल कठोर, सूखा, बाहर निकलने में कठिनाई।

6. Lycopodium – गैस, फुलाव, आत्मसंदेह के साथ कब्ज़।

भावनात्मक रूप से दबे हुए, निर्णय लेने में असुरक्षित व्यक्ति।

निष्कर्ष

कब्ज़ का इलाज केवल फाइबर, पानी या दवा से नहीं — बल्कि मन के बोझ को हल्का करने से शुरू होता है। जब हम अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखते हैं, अपने डर और अपराधबोध को छोड़ना सीखते हैं, तो शरीर भी धीरे-धीरे “छोड़ना” सीखता है।

डा. माना और डॉ. कार्तिक का संदेश है:

👉 “कब्ज़ केवल पेट की बीमारी नहीं, यह जीवन से चिपके रहने की प्रवृत्ति का संकेत है। जब हम मन को मुक्त करते हैं, तो शरीर भी स्वाभाविक रूप से मुक्त हो जाता है। होम्योपैथी इस आत्म-संतुलन की दिशा में एक कोमल, प्रभावी और सुरक्षित माध्यम है।”

संक्षेप में:

कब्ज़ का संबंध भावनात्मक अवरोधों से है.

होम्योपैथी मन–शरीर संतुलन को पुनः स्थापित करती है।

“छोड़ना सीखिए — शरीर भी सहजता से छोड़ेगा।”

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