सोरायसिस और भावनात्मक कारण: होम्योपैथिक दृष्टि से समाधान

Published Oct 3, 2025 3 min read

सोरायसिस और भावनात्मक कारण: होम्योपैथिक दृष्टि से समाधान — डॉ. माना एवं डॉ. कार्तिक

परिचय

सोरायसिस (Psoriasis) एक chronic, autoimmune skin disorder है, जिसमें त्वचा पर लाल व सफेद परतदार धब्बे दिखाई देते हैं। केवल शारीरिक कारण ही नहीं, बल्कि भावनात्मक एवं मानसिक कारक भी इस रोग के बढ़ने और घटने में अहम भूमिका निभाते हैं। होम्योपैथी रोग को “समग्र दृष्टि” से देखती है — यानी मन और शरीर दोनों को साथ लेकर।

डॉ. माना और डॉ. कार्तिक बताते हैं कि कई बार रोगियों में अनसुलझे भाव, तनाव, शोक या अपराधबोध सोरायसिस को भड़का सकते हैं। यदि इन भावनात्मक कारणों को समझकर उनका सही प्रबंधन किया जाए तो रोग नियंत्रण में काफी सहायता मिलती है।

सोरायसिस में भावनात्मक कारण (पॉइंट-वाइज़)

1. दीर्घकालिक तनाव (Chronic Stress)

काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ

Cortisol का बढ़ना → रोग प्रतिरोधक तंत्र असंतुलित

2. अपराधबोध / Self-criticism

स्वयं को कमतर आंकना

“मैं पर्याप्त अच्छा नहीं हूँ” जैसी सोच

3. शोक और हानि

प्रियजन की मृत्यु या संबंध-विच्छेद

भावनाएँ भीतर दबाकर रखना

4. सामाजिक भय और असुरक्षा

लक्षण दिखने पर हीनभावना

सार्वजनिक जगहों से बचना

5. क्रोध व हताशा

बार-बार flare होने से चिड़चिड़ापन

दबा हुआ गुस्सा रोग को और भड़काता है

6. जीवनशैली असंतुलन

नींद की कमी, अनुचित आहार, अधिक स्क्रीन-टाइम

मन और शरीर पर लगातार दबाव

होम्योपैथिक दृष्टिकोण

होम्योपैथी में उपचार केवल त्वचा की सतही समस्या पर नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, भावनाओं और समग्र लक्षणों पर आधारित होता है।

Totality of Symptoms — शारीरिक + मानसिक लक्षण

Mind–Body Connection — कौन-सी भावनाएँ flare बढ़ा रही हैं

व्यक्तिगत औषधि चयन — हर रोगी के लिए अलग-अलग दवा

सामान्य होम्योपैथिक औषधि सुझाव (केवल शैक्षिक जानकारी)

> ⚠️ ध्यान दें: दवा केवल प्रमाणित होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही लें।

Arsenicum album – चिंता, असुरक्षा, रात में खुजली व जलन

Graphites – त्वचा में मोटी परतें, दरारें, शर्मीलापन

Natrum muriaticum – अंतर्मुखी, पुराने शोक को दबाना

Ignatia – हाल का भावनात्मक झटका या शोक

Sepia – चिड़चिड़ापन, थकान, हार्मोनल असंतुलन

Sulphur – खुजली रात में बढ़े, गर्मी से असहजता

निष्कर्ष

सोरायसिस केवल त्वचा की बीमारी नहीं, बल्कि मन और शरीर के बीच असंतुलन का परिणाम भी हो सकता है। यदि हम तनाव, अपराधबोध, असुरक्षा और शोक जैसी भावनाओं को समझकर उन पर काम करें, तो रोग प्रबंधन आसान हो जाता है।

डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का संदेश है:

👉 “सोरायसिस को शर्म या डर की तरह न देखें। इसे एक संकेत मानें कि शरीर और मन दोनों को संतुलित करने की ज़रूरत है। होम्योपैथिक चिकित्सा, सही जीवनशैली और भावनात्मक संतुलन मिलकर रोग पर नियंत्रण ला सकते हैं।”