प्रस्तावना
बच्चों के उपचार में माता-पिता हमेशा ऐसी चिकित्सा प्रणाली की खोज में रहते हैं जो सुरक्षित (Safe), प्रभावी (Effective) और बिना दुष्प्रभाव (Side Effects) के हो। आधुनिक समय में जब एंटीबायोटिक और तेज़ असर वाली दवाओं के प्रयोग से बच्चों में कई बार पाचन संबंधी समस्याएँ, एलर्जी और बार-बार संक्रमण जैसी स्थितियाँ देखने को मिलती हैं, तब होम्योपैथी बच्चों के लिए एक नैसर्गिक और कोमल विकल्प के रूप में सामने आती है।
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होम्योपैथी की विशेषताएँ जो बच्चों को आकर्षित करती हैं
1. मिठास और स्वाद में आसानी
होम्योपैथिक दवाएँ प्रायः छोटे मीठे गोलियों (Globules) के रूप में दी जाती हैं।
बच्चे इन्हें दवा नहीं बल्कि मिठाई या टॉफ़ी समझकर आसानी से खा लेते हैं।
कड़वी या बड़ी गोलियों की तुलना में ये दवाएँ बच्चों के लिए बिल्कुल आसान होती हैं।
2. बिना इंजेक्शन, बिना डर
छोटे बच्चे इंजेक्शन और कड़वी दवाओं से डरते हैं।
होम्योपैथी में इंजेक्शन की जगह सिरप, ड्रॉप्स और मीठी गोलियाँ होती हैं।
इससे बच्चे तनाव मुक्त रहते हैं और इलाज के लिए उत्साहित भी रहते हैं।
3. गहरी और स्थायी चिकित्सा
होम्योपैथी केवल लक्षणों (Symptoms) को नहीं दबाती, बल्कि रोग की जड़ (Root Cause) तक पहुँचती है।
बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम, खाँसी, त्वचा रोग, पाचन समस्या या एलर्जी में बच्चों को दीर्घकालीन लाभ मिलता है।
4. कोई दुष्प्रभाव नहीं
बच्चों का शरीर नाज़ुक होता है, इसलिए दवाओं का दुष्प्रभाव जल्दी दिखाई देता है।
होम्योपैथिक दवाएँ अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में दी जाती हैं, जिससे सुरक्षा (Safety) की गारंटी रहती है।
5. भावनात्मक संतुलन
कई बच्चे भय, गुस्सा, चिड़चिड़ापन या पढ़ाई का तनाव झेलते हैं।
होम्योपैथी बच्चों के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक संतुलन को सुधारती है।
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डॉ. माना शर्मा का दृष्टिकोण
डॉ. माना कहती हैं – “होम्योपैथी बच्चों के लिए प्रकृति का दिया हुआ उपहार है। यह न केवल उनकी शारीरिक बीमारियों को ठीक करती है बल्कि उनके मन और व्यवहार को भी संतुलित करती है। माता-पिता को सबसे बड़ी राहत यही होती है कि बच्चा खुशी-खुशी दवा लेता है और धीरे-धीरे रोग से मुक्त होता है।”
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डॉ. कार्तिक शर्मा का दृष्टिकोण
डॉ. कार्तिक बताते हैं – “आज की भाग-दौड़ और प्रदूषण भरे वातावरण में बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बार-बार कमज़ोर होती है। होम्योपैथिक औषधियाँ प्राकृतिक तरीके से बच्चों की प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाती हैं। यही कारण है कि बच्चों को बार-बार होने वाली बीमारियाँ जैसे टॉन्सिल, सर्दी-जुकाम, खाँसी या त्वचा रोग होम्योपैथी से लंबे समय के लिए नियंत्रित हो जाते हैं।”
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लक्षणों से परे – डॉ. माना और डॉ. कार्तिक की अवधारणा
होम्योपैथी केवल यह नहीं देखती कि बच्चे को खाँसी, बुखार या पेट दर्द है, बल्कि यह भी देखती है कि उसकी प्रकृति, मानसिक स्थिति, नींद, भूख-प्यास और भावनाएँ कैसी हैं।
डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का मानना है कि – “हर बच्चा अद्वितीय है और उसकी बीमारी भी उसी तरह विशिष्ट है। इसलिए होम्योपैथी में इलाज सिर्फ बीमारी के नाम पर नहीं, बल्कि पूरे बच्चे को समझकर किया जाता है।”
यह दृष्टिकोण Whole Child Healing कहलाता है, जहाँ बच्चे के शरीर (Body), मन (Mind) और आत्मा (Spirit) – तीनों स्तरों को संतुलित करने पर ध्यान दिया जाता है।
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क्यों पसंद है बच्चों को होम्योपैथी? (संक्षेप में)
1. स्वादिष्ट और मीठी दवाएँ
2. बिना इंजेक्शन, बिना डर
3. लक्षणों की बजाय जड़ से उपचार
4. बिना दुष्प्रभाव
5. भावनात्मक और मानसिक संतुलन
6. पूरे बच्चे को समझकर व्यक्तिगत (Individualized) उपचार
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निष्कर्ष
बच्चे स्वभाव से सरल, कोमल और संवेदनशील होते हैं। उन्हें ऐसी चिकित्सा चाहिए जो उतनी ही कोमल हो। होम्योपैथी बच्चों की पसंद इसलिए बनती है क्योंकि यह आसान, सुरक्षित और प्रभावी है।
माता-पिता भी इसे अपनाकर निश्चिंत रहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ, खुशहाल और स्वाभाविक विकास की ओर बढ़ रहा है।
👉 डॉ. माना शर्मा और डॉ. कार्तिक शर्मा का स्पष्ट मत है कि –
“होम्योपैथी केवल लक्षणों का नहीं बल्कि पूरे बच्चे का इलाज करती है। यही कारण है कि यह बच्चों के लिए सबसे प्यारी और स्थायी चिकित्सा है।”