वज़न बढ़ने के पीछे छिपे भावनात्मक कारण

Published Oct 2, 2025 4 min read

⚖️ वज़न बढ़ने के पीछे छिपे भावनात्मक कारण – होम्योपैथी की दृष्टि से

लेखक: डॉ. माना शर्मा एवं डॉ. कार्तिक शर्मा

प्रस्तावना

अधिकांश लोग वज़न बढ़ने को सिर्फ़ ज्यादा खाने, कम व्यायाम करने या हार्मोनल गड़बड़ी से जोड़ते हैं। लेकिन होम्योपैथी का दृष्टिकोण इससे कहीं आगे है।

डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का कहना है कि –

👉 “Weight Gain केवल शरीर की समस्या नहीं है, यह हमारी भावनात्मक और मानसिक स्थिति का भी दर्पण है।”

होम्योपैथी के अनुसार, जब व्यक्ति अपनी भावनाओं को ठीक से व्यक्त नहीं कर पाता, तनाव में रहता है, या भीतर असुरक्षित महसूस करता है, तो यह धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा को अवरुद्ध कर देता है। यही ऊर्जा बाद में वज़न बढ़ने, चर्बी जमा होने और मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने के रूप में सामने आती है।

वज़न बढ़ने के पीछे संभावित भावनात्मक कारण

1. तनाव (Stress Eating)

लगातार मानसिक तनाव के कारण Cortisol हार्मोन बढ़ता है।

यह भूख को अस्वाभाविक रूप से बढ़ा देता है।

लोग “Comfort Food” (मीठा, तैलीय, जंक फूड) की ओर खिंचते हैं।

2. अकेलापन और उदासी (Loneliness & Sadness)

खालीपन या अकेलेपन की भावना को भरने के लिए बार-बार खाना।

उदासी से ग्रसित व्यक्ति भोजन को एक तरह की “Emotional Therapy” बना लेता है।

3. भावनाओं का दमन (Suppression of Emotions)

गुस्सा, दुःख या चोट को व्यक्त न करना।

बार-बार अपनी भावनाओं को दबाने से शरीर ‘Defense Mode’ में आ जाता है और चर्बी जमा होने लगती है।

4. असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी (Insecurity & Low Self-esteem)

खुद को दूसरों से कमतर महसूस करना।

“मैं अच्छा नहीं दिखता/दिखती” जैसी नकारात्मक सोच।

यह मनोस्थिति शरीर को और भारी बनाने लगती है, मानो सुरक्षा कवच (Protective Layer) बना रही हो।

5. अत्यधिक जिम्मेदारियाँ और दबाव (Over-burdened with Responsibilities)

लगातार थकान और जिम्मेदारियों से भाग न पाने की स्थिति।

इस बोझ को शरीर धीरे-धीरे वज़न बढ़ाकर दर्शाने लगता है।

6. भविष्य का डर (Fear of Future)

करियर, परिवार या रिश्तों की चिंता।

यह “अनजाना डर” मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है।

7. प्यार और सुरक्षा की कमी (Lack of Love & Care)

जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से उपेक्षित महसूस करता है, तो वह खाने में संतोष खोजने लगता है।

यह भावनात्मक भूख वज़न बढ़ाने का एक गहरा कारण है।

डॉ. माना शर्मा का दृष्टिकोण

डॉ. माना कहती हैं –

“Weight Gain केवल कैलोरी का खेल नहीं है। यह उस व्यक्ति के भावनात्मक घावों और मानसिक बोझ का परिणाम भी हो सकता है। जब हम रोगी से बातचीत करते हैं, तो हमें यह समझना ज़रूरी होता है कि उसका वजन सिर्फ़ खाने से नहीं, बल्कि उसके दिल और दिमाग से भी जुड़ा हुआ है। होम्योपैथी इसी गहराई में जाकर उपचार करती है।”

डॉ. कार्तिक शर्मा का दृष्टिकोण

डॉ. कार्तिक बताते हैं –

“हर रोगी का वज़न बढ़ने का कारण अलग होता है। किसी में यह तनाव से है, किसी में अकेलेपन से, किसी में रिश्तों की समस्याओं से। होम्योपैथी का सिद्धांत है – ‘Treat the Person, Not Just the Weight’। इसलिए हम केवल वजन घटाने पर नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के भावनात्मक संतुलन को सुधारने पर ध्यान देते हैं।”

होम्योपैथी क्यों असरदार है?

शरीर और मन दोनों स्तर पर काम करती है।

तनाव, असुरक्षा और दबे हुए भावनाओं को संतुलित करती है।

मेटाबॉलिज़्म और हार्मोनल सिस्टम को प्राकृतिक रूप से ठीक करती है।

बिना किसी दुष्प्रभाव के, दीर्घकालिक और स्थायी परिणाम देती है।

निष्कर्ष

वज़न बढ़ना केवल पेट और शरीर की समस्या नहीं है, यह हमारे मन और भावनाओं की स्थिति का भी प्रतीक है।

👉 डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का स्पष्ट मत है –

“जब तक रोगी के मन की गाँठें नहीं सुलझेंगी, तब तक शरीर हल्का नहीं होगा। होम्योपैथी का असली लक्ष्य यही है – शरीर और मन दोनों को संतुलन में लाना।”