PCOD और भावनात्मक पहलू –

Published Oct 2, 2025 3 min read

🌸 PCOD और भावनात्मक पहलू – होम्योपैथी की नज़र से

लेखक: डॉ. माना शर्मा एवं डॉ. कार्तिक शर्मा

प्रस्तावना

PCOD (Polycystic Ovarian Disease) आज की युवा और प्रजनन आयु की महिलाओं में एक आम समस्या बन चुकी है। आधुनिक चिकित्सा के अनुसार यह हार्मोनल असंतुलन और जीवनशैली की गड़बड़ी से जुड़ा है। लेकिन होम्योपैथी का दृष्टिकोण इससे भी गहरा है।

डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का मानना है कि –

👉 “PCOD सिर्फ हार्मोनल रोग नहीं है, बल्कि यह महिला के भावनात्मक संसार (Emotional World) का भी प्रतिबिंब है।”

होम्योपैथी में PCOD और भावनात्मक कारण

होम्योपैथी मानती है कि मन और शरीर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लंबे समय तक चलने वाले मानसिक दबाव, भावनाएँ और जीवन की परिस्थितियाँ हार्मोनल असंतुलन को जन्म देती हैं। यही असंतुलन समय के साथ PCOD का रूप ले सकता है।

संभावित भावनात्मक कारण और प्रभाव

1. अत्यधिक तनाव (Stress & Anxiety)

पढ़ाई, नौकरी या पारिवारिक दबाव।

लगातार चिंता से हार्मोनल असंतुलन और ओव्यूलेशन की गड़बड़ी।

2. असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी (Insecurity & Low Self-esteem)

खुद को दूसरों से कम समझना।

शरीर के प्रति असंतोष (Body Image Issues)।

यह स्थिति PCOD में देखे जाने वाले मोटापे और मुहांसों को और बढ़ा देती है।

3. भावनाओं को दबाना (Suppression of Emotions)

गुस्सा, रोना या दुःख व्यक्त न कर पाना।

“सब ठीक है” का दिखावा करना जबकि भीतर दर्द होना।

यह दबाव अंदरूनी ऊर्जा को रोकता है और मासिक धर्म की लय बिगाड़ देता है।

4. रिश्तों में संघर्ष (Relationship Conflicts)

पारिवारिक कलह, प्रेम संबंधों में अस्थिरता।

भावनात्मक चोट से मानसिक असंतुलन और हार्मोनल गड़बड़ी.

5. भविष्य की चिंता (Fear of Future)

शादी, संतानोत्पत्ति और करियर को लेकर असुरक्षा।

यह मानसिक असुरक्षा PCOD जैसी समस्याओं को जन्म देती है।

6. स्वयं को स्वीकार न कर पाना (Self-acceptance Issues)

समाज के मानकों से तुलना (सुंदरता, करियर, शादी)।

लगातार “मैं पर्याप्त नहीं हूँ” की भावना।

यह भावनात्मक दबाव शारीरिक स्तर पर PCOD को गहरा कर देता है।

डॉ. माना शर्मा का दृष्टिकोण

डॉ. माना कहती हैं –

“PCOD का उपचार केवल हार्मोनल गोलियों से नहीं हो सकता। जब तक महिला अपनी भावनाओं को पहचानकर उन्हें संतुलित नहीं करेगी, तब तक वास्तविक स्वास्थ्य संभव नहीं है। होम्योपैथी ऐसे में गहराई से काम करती है और रोगी की मानसिक-भावनात्मक अवस्था के अनुसार दवा चुनती है।”

डॉ. कार्तिक शर्मा का दृष्टिकोण

डॉ. कार्तिक बताते हैं –

“हर महिला का PCOD अलग है क्योंकि हर महिला का भावनात्मक संसार अलग है। कोई तनाव से पीड़ित है, कोई असुरक्षा से, और कोई रिश्तों के दबाव से। इसलिए होम्योपैथी एक ही दवा सबको नहीं देती, बल्कि हर महिला की ‘Unique Emotional Personality’ के अनुसार दवा चुनती है। यही इसकी ताकत है।”

होम्योपैथी क्यों असरदार है?

यह शरीर और मन दोनों स्तरों पर काम करती है।

भावनात्मक संतुलन लाकर हार्मोनल सिस्टम को सामान्य करती है।

मासिक धर्म की लय और ओवरी के कार्य को स्वाभाविक बनाती है।

बिना साइड इफेक्ट्स लंबे समय तक लाभ देती है।

निष्कर्ष

PCOD केवल हार्मोनल रोग नहीं है, बल्कि यह महिला के मन और भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

👉 डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का स्पष्ट मत है –

“PCOD का असली इलाज तब होगा जब हम महिला के शरीर के साथ-साथ उसके दिल और दिमाग की भी देखभाल करें। यही होम्योपैथी की शक्ति है – Care Beyond Symptoms।