होम्योपैथी – लक्षणों से परे देखभाल

Published Oct 1, 2025 4 min read

होम्योपैथी – लक्षणों से परे देखभाल

लेखक: डॉ. माना शर्मा एवं डॉ. कार्तिक शर्मा

प्रस्तावना

जब भी हम बीमार होते हैं, तो प्रायः डॉक्टर से यह सुनते हैं कि – “कौन-सा लक्षण है? बुखार है या खाँसी? दर्द कहाँ है?”।

लेकिन होम्योपैथी की खासियत यही है कि यह केवल इन लक्षणों पर ही ध्यान नहीं देती, बल्कि पूरे इंसान को समझने का प्रयास करती है।

डॉ. माना और डॉ. कार्तिक का मानना है कि –

“हर व्यक्ति की बीमारी केवल उसके लक्षण नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, भावनाएँ, आदतें और जीवन-शैली का प्रतिबिंब होती है।”

होम्योपैथी: लक्षणों से परे एक दृष्टि

एलोपैथी या अन्य चिकित्सा प्रणालियाँ अधिकतर लक्षण (Symptoms) को दबाने पर केंद्रित होती हैं – जैसे बुखार है तो पेरासिटामोल, दर्द है तो पेनकिलर।

होम्योपैथी कहती है कि – “लक्षण तो केवल शरीर की घंटी (Alarm) हैं, जो हमें बीमारी की गहराई का संकेत देते हैं।”

असली लक्ष्य है – बीमारी की जड़ (Root Cause) को समझना और शरीर को संतुलन की ओर ले जाना।

डॉ. माना शर्मा के विचार

डॉ. माना बताती हैं –

“जब कोई बच्चा बार-बार जुकाम से पीड़ित होता है, तो यह केवल वायरस का हमला नहीं होता। कभी-कभी यह उसकी प्रतिरोधक क्षमता की कमजोरी, बार-बार ठंडा खाना खाने की आदत, डरपोक स्वभाव या स्कूल के तनाव से भी जुड़ा हो सकता है। होम्योपैथी इन सब पहलुओं को देखती है। यही वजह है कि दवा देते समय हम केवल ‘खाँसी’ पर नहीं, बल्कि उस बच्चे की पूरी प्रकृति पर ध्यान देते हैं।”

उनके अनुसार, होम्योपैथी इलाज नहीं, बल्कि एक “समग्र देखभाल” (Holistic Care) है।

डॉ. कार्तिक शर्मा के विचार

डॉ. कार्तिक कहते हैं –

“किसी भी रोगी को देखकर हमें सिर्फ यह नहीं सोचना चाहिए कि उसकी बीमारी का नाम क्या है। हमें यह भी समझना होगा कि वह व्यक्ति कैसा है। क्या वह जल्दी गुस्सा करता है? क्या उसे अकेलापन परेशान करता है? क्या वह मौसम बदलने पर जल्दी बीमार पड़ता है?

होम्योपैथी का असली विज्ञान यही है कि हर रोगी को एक Unique Individual माना जाए। यही कारण है कि दो लोगों को एक जैसी खाँसी हो, तो भी उनकी दवा अलग हो सकती है।”

उनके अनुसार, होम्योपैथी का संदेश साफ है –

👉 “Treat the Patient, not the Disease” – यानी बीमारी नहीं, रोगी का इलाज करो।

आम भाषा में समझें

मान लीजिए –

किसी को पेट दर्द है।

एक व्यक्ति को पेट दर्द गैस से है, दूसरे को चिंता से, तीसरे को गलत भोजन से।

आधुनिक चिकित्सा में तीनों को एक ही तरह की दवा दी जा सकती है।

लेकिन होम्योपैथी तीनों को अलग-अलग दवा देती है, क्योंकि कारण और प्रकृति अलग हैं।

यही है – “Care Beyond Symptoms”।

क्यों है यह दृष्टिकोण ज़रूरी?

1. हर रोगी की प्रकृति और जीवन-शैली अलग होती है।

2. केवल लक्षण दबाने से बीमारी बार-बार लौट आती है।

3. जब जड़ कारण का इलाज होता है तो रोगी दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ रहता है।

4. यह पद्धति शरीर, मन और भावनाओं तीनों स्तरों पर काम करती है।

निष्कर्ष

होम्योपैथी की यही सबसे बड़ी शक्ति है कि यह संपूर्ण व्यक्ति को देखती है, न कि केवल उसकी बीमारी को।

डॉ. माना शर्मा और डॉ. कार्तिक शर्मा का मानना है कि –

“लक्षण सिर्फ संकेत हैं। असली उपचार तब होता है जब हम उस व्यक्ति के भीतर के संतुलन को बहाल कर दें। यही है – होम्योपैथी की असली आत्मा।”

👉 इसीलिए, होम्योपैथी आज लाखों माता-पिता और परिवारों की पहली पसंद है – सुरक्षित, कोमल और स्थायी स्वास्थ्य के लिए।